ब्लड शुगर (डायबिटीज) बढ़ने पर शरीर में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना और थकान जैसे प्रमुख लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा ज्यादा भूख लगना, धुंधला दिखाई देना, घाव देर से भरना और बिना कारण वजन कम होना भी बढ़ी हुई शुगर के संकेत हो सकते हैं।
हालांकि, खासकर टाइप 2 डायबिटीज में कई लोगों को शुरुआती समय में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए यदि ये संकेत बार-बार दिखाई दें या परिवार में डायबिटीज का इतिहास हो, तो ब्लड शुगर की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
ब्लड शुगर क्या होती है?
हम जो भोजन खाते हैं, उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट पाचन के बाद ग्लूकोज में बदल जाते हैं। यही ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है।
इंसुलिन नामक हार्मोन ग्लूकोज को रक्त से कोशिकाओं के अंदर पहुंचाने में मदद करता है।
जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या शरीर इंसुलिन को ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो रक्त में ग्लूकोज बढ़ने लगता है। लगातार बढ़ी हुई ब्लड शुगर डायबिटीज का संकेत हो सकती है।
शुगर होने के मुख्य लक्षण क्या हैं?
1. बार-बार पेशाब आना
ब्लड शुगर अधिक होने पर गुर्दे अतिरिक्त ग्लूकोज को शरीर से बाहर निकालने की कोशिश करते हैं।
इस कारण व्यक्ति को:
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बार-बार पेशाब आ सकता है
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रात में कई बार उठना पड़ सकता है
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पेशाब की मात्रा बढ़ सकती है
बार-बार पेशाब आना डायबिटीज के सामान्य शुरुआती संकेतों में से एक है।
2. बहुत ज्यादा प्यास लगना
बार-बार पेशाब आने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
इस वजह से:
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मुंह सूखना
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लगातार पानी पीने की इच्छा
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सामान्य से अधिक प्यास
महसूस हो सकती है।
अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद बहुत अधिक प्यास लग रही है, तो ब्लड शुगर की जांच उपयोगी हो सकती है।
3. बार-बार भूख लगना
शरीर में पर्याप्त ग्लूकोज होने के बावजूद यदि वह कोशिकाओं तक ठीक से नहीं पहुंच पा रहा है, तो शरीर ऊर्जा की कमी महसूस कर सकता है।
इस कारण खाना खाने के बाद भी बार-बार भूख लग सकती है।
4. कमजोरी और थकान
ब्लड शुगर अधिक होने पर व्यक्ति को लगातार:
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कमजोरी
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सुस्ती
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काम करने में ऊर्जा की कमी
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जल्दी थक जाना
महसूस हो सकता है।
थकान के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इस लक्षण से डायबिटीज की पुष्टि नहीं होती।
5. बिना कारण वजन कम होना
विशेषकर टाइप 1 डायबिटीज में शरीर ऊर्जा के लिए वसा और मांसपेशियों का उपयोग शुरू कर सकता है, जिससे पर्याप्त भोजन लेने के बावजूद वजन कम हो सकता है।
बिना प्रयास के लगातार वजन कम होना चिकित्सकीय जांच का कारण है।
6. धुंधला दिखाई देना
ब्लड शुगर में बदलाव आंखों के भीतर तरल संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
इससे:
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धुंधला दिखाई देना
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नजर में अस्थायी बदलाव
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पढ़ने में परेशानी
हो सकती है।
लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज आंखों को नुकसान भी पहुंचा सकती है।
7. घाव देर से भरना
अगर छोटी चोट, कट या घाव सामान्य से अधिक समय में ठीक हो रहा है, तो यह लंबे समय से अधिक ब्लड शुगर से जुड़ा हो सकता है।
उच्च शुगर रक्त प्रवाह और शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
8. बार-बार संक्रमण होना
ब्लड शुगर अधिक रहने पर कुछ लोगों में संक्रमण बार-बार हो सकते हैं।
इनमें शामिल हो सकते हैं:
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त्वचा संक्रमण
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मूत्र संक्रमण
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फंगल संक्रमण
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मसूड़ों की समस्या
बार-बार संक्रमण भी डायबिटीज की जांच का कारण हो सकता है।
9. हाथ-पैर में झनझनाहट
लंबे समय तक ब्लड शुगर अधिक रहने पर नसों पर असर पड़ सकता है।
इसके कारण:
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झनझनाहट
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सुन्नपन
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जलन
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चुभन जैसा महसूस होना
विशेषकर पैरों और हाथों में हो सकता है।
यह आमतौर पर लंबे समय से मौजूद डायबिटीज में अधिक देखा जाता है।
10. त्वचा में खुजली या सूखापन
शरीर में पानी की कमी और ब्लड शुगर में बदलाव के कारण कुछ लोगों में त्वचा अधिक सूखी या खुजली वाली हो सकती है।
हालांकि त्वचा की खुजली के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
पुरुषों में शुगर के लक्षण क्या हैं?
पुरुषों में डायबिटीज के अधिकांश सामान्य लक्षण महिलाओं जैसे ही होते हैं, जैसे:
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बार-बार पेशाब
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ज्यादा प्यास
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ज्यादा भूख
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कमजोरी
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धुंधला दिखाई देना
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घाव देर से भरना
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वजन कम होना
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हाथ-पैर में झनझनाहट
इसके अलावा लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज कुछ पुरुषों में नसों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करके यौन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है।
ऐसे लक्षण होने पर उन्हें केवल उम्र या तनाव से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या महिलाओं और पुरुषों में शुगर के लक्षण अलग होते हैं?
अधिकांश मुख्य लक्षण दोनों में समान होते हैं।
हालांकि महिलाओं में बार-बार फंगल संक्रमण या गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज जैसी स्थितियां अलग रूप से सामने आ सकती हैं।
गर्भावस्था में होने वाली डायबिटीज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए डॉक्टर द्वारा सुझाई गई जांच महत्वपूर्ण होती है।
शुगर बढ़ने के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में दिखाई देने वाले संकेतों में शामिल हो सकते हैं:
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ज्यादा प्यास
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बार-बार पेशाब
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भूख बढ़ना
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सामान्य से अधिक थकान
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नजर धुंधली होना
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मुंह सूखना
लेकिन टाइप 2 डायबिटीज धीरे-धीरे विकसित हो सकती है और कई लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
इसीलिए केवल लक्षणों का इंतजार करना उचित नहीं है।
क्या बिना लक्षण के भी शुगर हो सकती है?
हां।
टाइप 2 डायबिटीज वाले बहुत से लोगों में शुरुआती वर्षों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
कई बार डायबिटीज का पता नियमित रक्त जांच में चलता है।
अगर परिवार में डायबिटीज है, वजन अधिक है या डॉक्टर ने जोखिम बताया है, तो नियमित जांच उपयोगी हो सकती है।
ब्लड शुगर बढ़ने के कारण क्या हैं?
ब्लड शुगर बढ़ने के पीछे कई कारण और जोखिम कारक हो सकते हैं।
अधिक वजन
अधिक वजन, विशेषकर पेट के आसपास अतिरिक्त वसा, इंसुलिन के प्रभाव को कम कर सकती है।
शारीरिक गतिविधि की कमी
कम सक्रिय जीवनशैली से शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है।
परिवार में डायबिटीज
माता-पिता या भाई-बहन को टाइप 2 डायबिटीज होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
असंतुलित खान-पान
अत्यधिक कैलोरी, मीठे पेय और बहुत अधिक प्रसंस्कृत भोजन वजन और रक्त शर्करा नियंत्रण को प्रभावित कर सकते हैं।
उम्र
उम्र बढ़ने के साथ टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है, हालांकि यह कम उम्र में भी हो सकती है।
इंसुलिन प्रतिरोध
इस स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता और धीरे-धीरे ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
अधिक वजन, कम शारीरिक गतिविधि और इंसुलिन प्रतिरोध टाइप 2 डायबिटीज के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल हैं।
शुगर की जांच कैसे होती है?
डायबिटीज की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं की जाती। इसके लिए रक्त जांच जरूरी होती है।
खाली पेट ब्लड शुगर
इस जांच में आमतौर पर कम से कम 8 घंटे बिना भोजन के रहने के बाद ब्लड शुगर जांची जाती है।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार:
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100 मिलीग्राम/डेसीलीटर से कम: सामान्य
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100–125: प्रीडायबिटीज सीमा
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126 या अधिक: डायबिटीज की सीमा
आमतौर पर निदान की पुष्टि डॉक्टर द्वारा उचित तरीके से दोहराई गई या अन्य जांच के साथ की जाती है।
एचबीए1सी जांच
यह जांच पिछले लगभग 2–3 महीनों की औसत ब्लड शुगर के बारे में जानकारी देती है।
सामान्यतः:
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5.7% से कम: सामान्य
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5.7%–6.4%: प्रीडायबिटीज
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6.5% या अधिक: डायबिटीज की सीमा
नतीजों की व्याख्या डॉक्टर को मरीज की पूरी स्थिति के अनुसार करनी चाहिए।
क्या घर की मशीन से डायबिटीज की पुष्टि हो सकती है?
घर पर ग्लूकोमीटर ब्लड शुगर की निगरानी के लिए उपयोगी हो सकता है।
लेकिन डायबिटीज का औपचारिक निदान आमतौर पर प्रयोगशाला में की गई उचित रक्त जांच और डॉक्टर के मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
एक बार बढ़ी हुई रीडिंग आने का मतलब हमेशा डायबिटीज नहीं होता।
ब्लड शुगर का इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को:
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टाइप 1 डायबिटीज है
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टाइप 2 डायबिटीज है
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गर्भावस्था से जुड़ी डायबिटीज है
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या केवल प्रीडायबिटीज है
उपचार में कई तरीके शामिल हो सकते हैं।
1. खान-पान में सुधार
संतुलित भोजन ब्लड शुगर नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ध्यान रखें:
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भोजन का समय नियमित रखें
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सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें
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पर्याप्त प्रोटीन लें
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मीठे पेय कम करें
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अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन सीमित करें
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एक बार में बहुत ज्यादा खाने से बचें
किसी एक भोजन को पूरी तरह बंद करना हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होता।
2. नियमित शारीरिक गतिविधि
नियमित व्यायाम शरीर को इंसुलिन का बेहतर उपयोग करने में मदद कर सकता है।
चलना, हल्का व्यायाम और अन्य गतिविधियां व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार चुनी जा सकती हैं।
अगर डायबिटीज के साथ हृदय, आंख, पैर या अन्य गंभीर समस्या है, तो नया व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
3. वजन नियंत्रित करना
अधिक वजन वाले लोगों में स्वस्थ तरीके से वजन कम करने से ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर हो सकता है।
टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम वाले लोगों में वजन नियंत्रण और नियमित गतिविधि बीमारी को रोकने या देर से विकसित होने में मदद कर सकती है।
4. दवाएं
टाइप 2 डायबिटीज में डॉक्टर ब्लड शुगर, अन्य बीमारियों, वजन और स्वास्थ्य के आधार पर दवाएं लिख सकते हैं।
कौन-सी दवा और कितनी मात्रा लेनी है, यह स्वयं तय नहीं करना चाहिए।
5. इंसुलिन
टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन आवश्यक होता है।
टाइप 2 डायबिटीज वाले कुछ लोगों को भी बीमारी की स्थिति के अनुसार इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।
6. नियमित ब्लड शुगर निगरानी
कुछ मरीजों को नियमित रूप से घर पर ब्लड शुगर जांचने की सलाह दी जाती है।
कितनी बार जांच करनी है, यह दवा, इंसुलिन और बीमारी के नियंत्रण पर निर्भर करता है।
शुगर कम करने के लिए क्या खाना चाहिए?
कोई एक ऐसा भोजन नहीं है जो डायबिटीज को तुरंत समाप्त कर दे।
संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है:
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हरी सब्जियां
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सलाद
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दालें
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साबुत अनाज
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नियंत्रित मात्रा में फल
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कम वसा वाला प्रोटीन
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पर्याप्त पानी
भोजन की मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना भोजन का प्रकार।
शुगर में क्या कम खाना चाहिए?
इनका अत्यधिक सेवन सीमित करना उपयोगी हो सकता है:
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मीठे पेय
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अधिक चीनी
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मिठाइयां
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अत्यधिक मैदा
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बहुत ज्यादा तला भोजन
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अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ
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बड़ी मात्रा में एक साथ भोजन
पूरी भोजन योजना मरीज की जरूरत के अनुसार बनाई जानी चाहिए।
क्या डायबिटीज का इलाज केवल खान-पान से हो सकता है?
कुछ लोगों में शुरुआती टाइप 2 डायबिटीज या प्रीडायबिटीज में जीवनशैली में सुधार से ब्लड शुगर पर काफी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
लेकिन सभी मरीज केवल खान-पान से बीमारी नियंत्रित नहीं कर सकते।
कई लोगों को दवाओं या इंसुलिन की आवश्यकता होती है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है।
क्या शुगर हमेशा के लिए ठीक हो सकती है?
इसका उत्तर डायबिटीज के प्रकार पर निर्भर करता है।
टाइप 1 डायबिटीज के लिए वर्तमान में नियमित इंसुलिन उपचार आवश्यक होता है।
टाइप 2 डायबिटीज में वजन, भोजन और जीवनशैली में बड़े बदलाव से कुछ लोगों में ब्लड शुगर लंबे समय तक बेहतर स्तर पर आ सकती है, लेकिन इसे हर मरीज के लिए स्थायी इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
नियमित निगरानी आवश्यक रहती है।
बहुत ज्यादा शुगर बढ़ने पर क्या होता है?
बहुत अधिक ब्लड शुगर के कारण:
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बहुत अधिक प्यास
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बार-बार पेशाब
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कमजोरी
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धुंधली नजर
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शरीर में पानी की कमी
हो सकती है। बहुत ज्यादा शुगर गंभीर स्थिति में भ्रम या बेहोशी तक पैदा कर सकती है।
किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें यदि डायबिटीज या बहुत अधिक ब्लड शुगर के साथ:
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बार-बार उल्टी
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पेट में तेज दर्द
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सांस लेने में परेशानी
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बहुत ज्यादा कमजोरी
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भ्रम
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बेहोशी
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अत्यधिक पानी की कमी
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सांस में फल जैसी गंध
हो।
ये गंभीर जटिलता के संकेत हो सकते हैं और आपातकालीन उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।
शुगर को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?
रोजमर्रा में कुछ आदतें मदद कर सकती हैं:
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भोजन का समय नियमित रखें
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मीठे पेय कम करें
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रोज सक्रिय रहें
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स्वस्थ वजन बनाए रखें
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पर्याप्त नींद लें
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डॉक्टर की बताई दवा समय पर लें
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नियमित जांच कराएं
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धूम्रपान से बचें
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पैरों और त्वचा में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
डॉक्टर से जांच कराएं यदि:
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बार-बार बहुत ज्यादा प्यास लग रही हो
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बार-बार पेशाब आ रहा हो
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बिना कारण वजन कम हो
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लगातार कमजोरी हो
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नजर धुंधली हो
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घाव देर से भर रहे हों
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बार-बार संक्रमण हो
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घर की जांच में शुगर लगातार अधिक आ रही हो
लक्षण न होने पर भी जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच की जरूरत हो सकती है।
निष्कर्ष
ब्लड शुगर बढ़ना हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना, ज्यादा भूख लगना या घाव देर से भरना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं, जबकि कई लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर डायबिटीज का अनुमान लगाने के बजाय ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी है। सही खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं से ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
अगर शुगर की रीडिंग बार-बार बढ़ी हुई आ रही है या नए लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। डॉ. राजेश, गुरुग्राम में जनरल सर्जन, वजन प्रबंधन, बेरिएट्रिक सर्जरी और अन्य सामान्य शल्य चिकित्सा संबंधी समस्याओं के लिए परामर्श प्रदान करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. शुगर होने का सबसे पहला लक्षण क्या है?
बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और थकान शुरुआती संकेत हो सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं होता।
2. पुरुषों में शुगर के मुख्य लक्षण क्या हैं?
बार-बार पेशाब, प्यास, भूख, कमजोरी, धुंधली नजर, घाव देर से भरना और झनझनाहट पुरुषों में भी सामान्य संकेत हैं।
3. क्या बार-बार पेशाब आना शुगर का लक्षण है?
हां, बढ़ी हुई ब्लड शुगर के कारण पेशाब की मात्रा और आवृत्ति बढ़ सकती है।
4. क्या शुगर में वजन कम होता है?
अनियंत्रित डायबिटीज में कुछ लोगों का बिना प्रयास वजन कम हो सकता है।
5. क्या बिना लक्षण के डायबिटीज हो सकती है?
हां। खासकर टाइप 2 डायबिटीज लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है।
6. क्या ज्यादा मीठा खाने से ही डायबिटीज होती है?
नहीं। टाइप 2 डायबिटीज में आनुवंशिकता, वजन, शारीरिक गतिविधि और इंसुलिन प्रतिरोध सहित कई कारक भूमिका निभाते हैं।
7. डायबिटीज की पुष्टि कौन-सी जांच से होती है?
खाली पेट ब्लड शुगर, एचबीए1सी और आवश्यकता के अनुसार अन्य रक्त जांच का उपयोग किया जा सकता है।
8. क्या डायबिटीज में फल खा सकते हैं?
अधिकांश मरीज नियंत्रित मात्रा में फल खा सकते हैं, लेकिन मात्रा और चयन व्यक्तिगत भोजन योजना के अनुसार होना चाहिए।
9. क्या रोज चलने से ब्लड शुगर कम हो सकती है?
नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता और ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद कर सकती है।
10. ब्लड शुगर बहुत अधिक हो तो क्या करें?
यदि रीडिंग लगातार बहुत अधिक है या उल्टी, सांस में परेशानी, भ्रम या गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण हैं, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।