हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी अंगों और ऊतकों तक पहुंचाता है और वहां से कार्बन डाइऑक्साइड वापस लाता है।
जब हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, तो शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और कमजोरी, थकान, चक्कर, सांस फूलना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
हीमोग्लोबिन कम होने के पीछे आयरन की कमी, विटामिन की कमी, अधिक रक्तस्राव, पाचन तंत्र से खून जाना, गुर्दे की बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए केवल हीमोग्लोबिन बढ़ाने के बजाय उसके कम होने का कारण समझना जरूरी है।
हीमोग्लोबिन क्या होता है?
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर मौजूद एक प्रोटीन है। इसमें आयरन होता है और इसका मुख्य काम शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाना है।
जब हम सांस लेते हैं, तो फेफड़ों में ऑक्सीजन रक्त में पहुंचती है। हीमोग्लोबिन इस ऑक्सीजन को बांधकर:
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मस्तिष्क
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हृदय
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मांसपेशियों
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गुर्दों
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अन्य अंगों और ऊतकों
तक पहुंचाता है।
इसके बाद यह शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाता है।
हीमोग्लोबिन कम होने का क्या मतलब है?
जब रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर उम्र और लिंग के अनुसार सामान्य सीमा से कम हो जाता है, तो इसे अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से जोड़ा जाता है।
हालांकि हीमोग्लोबिन कम होना स्वयं में अंतिम निदान नहीं है। यह पता लगाना जरूरी होता है कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।
उदाहरण के लिए, कमी हो सकती है:
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शरीर में पर्याप्त आयरन न होने से
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विटामिन की कमी से
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शरीर से लगातार खून निकलने से
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लाल रक्त कोशिकाएं कम बनने से
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लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी टूटने से
हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए?
हीमोग्लोबिन की सामान्य सीमा उम्र, लिंग, गर्भावस्था और प्रयोगशाला के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।
आमतौर पर वयस्कों में लगभग:
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पुरुष: 13 से 17 ग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास
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महिलाएं: 12 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास
की सीमा सामान्य मानी जा सकती है।
लेकिन केवल एक संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता तय नहीं करनी चाहिए। रिपोर्ट की व्याख्या डॉक्टर को अन्य रक्त जांच और मरीज के लक्षणों के साथ करनी चाहिए।
खून की कमी के मुख्य लक्षण क्या हैं?
हीमोग्लोबिन धीरे-धीरे कम होने पर शुरुआत में बहुत स्पष्ट लक्षण नहीं भी हो सकते हैं।
स्तर अधिक कम होने पर निम्न संकेत दिखाई दे सकते हैं।
1. लगातार कमजोरी और थकान
शरीर के ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर व्यक्ति जल्दी थक सकता है।
सामान्य काम करने के बाद भी:
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कमजोरी
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सुस्ती
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ऊर्जा की कमी
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काम करने का मन न होना
महसूस हो सकता है।
2. चक्कर आना
हीमोग्लोबिन कम होने पर मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इससे:
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चक्कर
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हल्कापन
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खड़े होने पर कमजोरी
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बेहोशी जैसा महसूस होना
हो सकता है।
3. त्वचा और चेहरा पीला पड़ना
खून की कमी में त्वचा का रंग सामान्य से हल्का दिखाई दे सकता है।
विशेष रूप से:
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चेहरा
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होंठ
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हथेली
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आंखों की निचली पलक
पीली दिखाई दे सकती है।
4. सांस फूलना
हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करता है।
इसके कारण:
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चलने पर सांस फूलना
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सीढ़ियां चढ़ते समय सांस तेज होना
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थोड़ी मेहनत में थक जाना
हो सकता है।
5. दिल की धड़कन तेज होना
ऑक्सीजन की कमी की भरपाई करने के लिए हृदय तेजी से रक्त पंप कर सकता है।
इससे कुछ लोगों को:
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तेज धड़कन
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धड़कन महसूस होना
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बेचैनी
हो सकती है।
6. सिरदर्द
हीमोग्लोबिन की कमी के कारण कुछ लोगों में बार-बार सिरदर्द हो सकता है।
सिरदर्द के कई अन्य कारण भी होते हैं, इसलिए केवल इसके आधार पर खून की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
7. हाथ-पैर ठंडे रहना
कम हीमोग्लोबिन और रक्त प्रवाह में बदलाव के कारण हाथ-पैर सामान्य से ज्यादा ठंडे महसूस हो सकते हैं।
8. ध्यान लगाने में परेशानी
गंभीर या लंबे समय से मौजूद खून की कमी में:
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ध्यान कम लगना
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काम में एकाग्रता कम होना
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चिड़चिड़ापन
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मानसिक थकान
महसूस हो सकती है।
9. बाल झड़ना
आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया में कुछ लोगों में बाल झड़ने की समस्या बढ़ सकती है।
हालांकि बाल झड़ने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
10. नाखून कमजोर होना
आयरन की लंबे समय से कमी होने पर नाखून:
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कमजोर
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आसानी से टूटने वाले
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पतले
हो सकते हैं।
11. मिट्टी या बर्फ खाने की इच्छा
कुछ लोगों में आयरन की कमी के दौरान ऐसी चीजें खाने की इच्छा हो सकती है जो भोजन नहीं हैं, जैसे:
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मिट्टी
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बर्फ
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चॉक
इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हीमोग्लोबिन कम होने के मुख्य कारण
1. आयरन की कमी
आयरन हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी है।
आयरन की कमी हो सकती है:
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भोजन में आयरन कम होने से
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लंबे समय तक रक्तस्राव से
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गर्भावस्था में जरूरत बढ़ने से
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शरीर में आयरन का अवशोषण कम होने से
यह खून की कमी के सामान्य कारणों में से एक है।
2. अधिक मासिक रक्तस्राव
महिलाओं में लंबे समय तक बहुत अधिक मासिक रक्तस्राव होने पर धीरे-धीरे आयरन और हीमोग्लोबिन कम हो सकता है।
यदि हर महीने अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है, तो इसका कारण भी पता करना जरूरी है।
3. पाचन तंत्र से रक्तस्राव
शरीर के अंदर धीरे-धीरे होने वाला रक्तस्राव भी हीमोग्लोबिन कम कर सकता है।
संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं:
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पेट या आंत का अल्सर
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पाइल्स से बार-बार रक्तस्राव
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पाचन तंत्र की कुछ बीमारियां
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कुछ दवाओं के कारण रक्तस्राव
अगर मल काला हो या मल में बार-बार खून आए, तो जांच जरूरी है।
4. विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए जरूरी है।
इसकी कमी से एनीमिया के साथ:
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कमजोरी
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झनझनाहट
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सुन्नपन
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संतुलन में परेशानी
भी हो सकती है।
5. फोलेट की कमी
फोलेट भी नई रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए जरूरी है।
आहार में कमी या शरीर द्वारा इसका सही अवशोषण न होने पर हीमोग्लोबिन कम हो सकता है।
6. गर्भावस्था
गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक आयरन और रक्त की जरूरत होती है।
यदि पोषण पर्याप्त न हो, तो हीमोग्लोबिन कम हो सकता है।
7. गुर्दे की बीमारी
गुर्दे एक ऐसा हार्मोन बनाने में भूमिका निभाते हैं जो अस्थि मज्जा को लाल रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए प्रेरित करता है।
गुर्दे की लंबे समय की बीमारी में इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है और एनीमिया हो सकती है।
8. लंबे समय से चल रही बीमारी
कुछ पुरानी बीमारियों और लंबे समय तक रहने वाली सूजन में भी शरीर लाल रक्त कोशिकाओं को सामान्य मात्रा में नहीं बना पाता।
9. लाल रक्त कोशिकाओं का जल्दी टूटना
कुछ स्थितियों में शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य समय से पहले टूटने लगती हैं।
इससे भी हीमोग्लोबिन कम हो सकता है।
10. अस्थि मज्जा से जुड़ी समस्या
लाल रक्त कोशिकाएं अस्थि मज्जा में बनती हैं।
कुछ दुर्लभ स्थितियों में अस्थि मज्जा पर्याप्त रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता, जिससे गंभीर एनीमिया हो सकती है।
हीमोग्लोबिन की कमी से कौन-सा रोग होता है?
हीमोग्लोबिन कम होने की स्थिति को आमतौर पर एनीमिया यानी खून की कमी कहा जाता है।
लेकिन यह समझना जरूरी है कि एनीमिया कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है।
मुख्य प्रकारों में शामिल हो सकते हैं:
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आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया
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विटामिन बी12 की कमी से होने वाली एनीमिया
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फोलेट की कमी
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लंबे समय की बीमारी से जुड़ी एनीमिया
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रक्त कोशिकाओं के टूटने से होने वाली एनीमिया
इसलिए केवल आयरन की गोली शुरू करने से पहले कमी का कारण जानना जरूरी है।
महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम क्यों होता है?
महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम होने के सामान्य कारणों में शामिल हैं:
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अधिक मासिक रक्तस्राव
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गर्भावस्था
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स्तनपान के दौरान बढ़ी पोषण आवश्यकता
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भोजन में आयरन की कमी
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विटामिन बी12 या फोलेट की कमी
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शरीर से किसी अन्य कारण से खून जाना
बार-बार कमजोरी और चक्कर को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पुरुषों में हीमोग्लोबिन कम होने के कारण क्या हैं?
पुरुषों में बिना स्पष्ट कारण हीमोग्लोबिन कम होना विशेष रूप से जांच का विषय हो सकता है।
कारणों में शामिल हो सकते हैं:
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आहार में पोषक तत्वों की कमी
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पाचन तंत्र से रक्तस्राव
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अल्सर
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पाइल्स से लगातार खून
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गुर्दे की बीमारी
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लंबे समय की अन्य बीमारी
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विटामिन की कमी
बार-बार कम रिपोर्ट आने पर कारण का पता लगाना जरूरी है।
हीमोग्लोबिन की जांच कैसे होती है?
हीमोग्लोबिन की जांच सामान्य रक्त जांच के माध्यम से की जाती है।
आमतौर पर डॉक्टर पूर्ण रक्त गणना की जांच करवा सकते हैं।
इससे जानकारी मिलती है:
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हीमोग्लोबिन स्तर
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लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या
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कोशिकाओं का आकार
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सफेद रक्त कोशिकाएं
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प्लेटलेट
इसके बाद कारण जानने के लिए अन्य जांच की जरूरत पड़ सकती है।
हीमोग्लोबिन कम होने पर कौन-सी जांच हो सकती है?
स्थिति के अनुसार डॉक्टर सलाह दे सकते हैं:
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आयरन की जांच
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शरीर में जमा आयरन की जांच
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विटामिन बी12
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फोलेट
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गुर्दे की जांच
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यकृत की जांच
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मल में छिपे खून की जांच
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अन्य आवश्यक रक्त जांच
यदि शरीर से खून जाने का संदेह है, तो उसके स्रोत की जांच भी जरूरी हो सकती है।
हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए क्या खाएं?
आहार में आयरन और रक्त निर्माण के लिए जरूरी पोषक तत्व शामिल करना उपयोगी है।
हरी पत्तेदार सब्जियां
जैसे:
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पालक
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सरसों का साग
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मेथी
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चौलाई
इनमें आयरन सहित कई पोषक तत्व होते हैं।
दालें और फलियां
इनमें शामिल हैं:
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मसूर
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मूंग
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चना
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राजमा
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लोबिया
ये आयरन और प्रोटीन प्रदान कर सकती हैं।
तिल और बीज
तिल, कुछ बीज और मेवे भी संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं।
अंडा
अंडा प्रोटीन सहित कई पोषक तत्व प्रदान करता है।
मांसाहारी स्रोत
मांसाहार लेने वाले लोग डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार:
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मांस
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मछली
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अंडा
शामिल कर सकते हैं।
विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थ
विटामिन सी पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में मदद करता है।
जैसे:
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आंवला
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अमरूद
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संतरा
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नींबू
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टमाटर
आयरन वाले भोजन के साथ इन्हें लेना उपयोगी हो सकता है।
क्या अनार खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है?
अनार एक पौष्टिक फल है और संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है।
लेकिन गंभीर आयरन की कमी या एनीमिया केवल अनार खाने से ठीक नहीं होती।
यदि हीमोग्लोबिन बहुत कम है, तो कारण के अनुसार चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
क्या चुकंदर हीमोग्लोबिन बढ़ाता है?
चुकंदर में फोलेट और अन्य पोषक तत्व होते हैं और इसे संतुलित भोजन में शामिल किया जा सकता है।
लेकिन इसे हीमोग्लोबिन बढ़ाने का अकेला उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
हीमोग्लोबिन कम होने का उपचार कैसे किया जाता है?
उपचार पूरी तरह कमी के कारण पर निर्भर करता है।
आयरन की कमी होने पर
डॉक्टर आयरन युक्त भोजन और जरूरत होने पर आयरन की दवा दे सकते हैं।
बिना जांच लंबे समय तक आयरन की दवा लेना उचित नहीं है।
विटामिन की कमी होने पर
विटामिन बी12 या फोलेट की कमी मिलने पर उसकी पूर्ति की जाती है।
रक्तस्राव होने पर
अगर शरीर से लगातार खून जा रहा है, तो केवल हीमोग्लोबिन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।
रक्तस्राव के कारण का उपचार करना जरूरी है।
अन्य बीमारी होने पर
गुर्दे, पाचन तंत्र या अन्य बीमारी के कारण एनीमिया होने पर मूल बीमारी का इलाज भी आवश्यक है।
क्या बहुत कम हीमोग्लोबिन में खून चढ़ाना पड़ता है?
हर कम हीमोग्लोबिन वाले मरीज को रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं होती।
इसका निर्णय केवल संख्या देखकर नहीं किया जाता।
डॉक्टर यह देखते हैं:
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हीमोग्लोबिन कितना कम है
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मरीज के लक्षण
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रक्तस्राव हो रहा है या नहीं
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हृदय की स्थिति
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कमी कितनी तेजी से हुई
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मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति
गंभीर स्थिति में रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
हीमोग्लोबिन जल्दी कैसे बढ़ाएं?
हीमोग्लोबिन कितनी जल्दी बढ़ेगा यह कारण पर निर्भर करता है।
अगर कारण आयरन की कमी है, तो:
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उचित आयरन उपचार
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संतुलित भोजन
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विटामिन सी
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रक्तस्राव का उपचार
मदद कर सकते हैं।
लेकिन कोई भी घरेलू भोजन एक-दो दिन में गंभीर एनीमिया ठीक नहीं कर सकता।
क्या चाय और कॉफी आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं?
चाय और कॉफी में मौजूद कुछ तत्व भोजन से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं।
यदि आयरन की कमी है, तो डॉक्टर भोजन और चाय-कॉफी के बीच कुछ अंतर रखने की सलाह दे सकते हैं।
क्या पाइल्स से हीमोग्लोबिन कम हो सकता है?
अगर पाइल्स के कारण बार-बार या लंबे समय तक रक्तस्राव होता रहे, तो धीरे-धीरे आयरन की कमी और हीमोग्लोबिन कम हो सकता है।
मल में बार-बार खून आने को केवल पाइल्स मान लेना भी उचित नहीं है।
कारण की जांच जरूरी होती है।
क्या पेट या आंत से खून जाने पर हीमोग्लोबिन कम होता है?
हां।
पाचन तंत्र में धीरे-धीरे होने वाला रक्तस्राव लंबे समय में हीमोग्लोबिन कम कर सकता है।
इसके संकेत हो सकते हैं:
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काला मल
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मल में खून
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कमजोरी
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लगातार चक्कर
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बिना कारण हीमोग्लोबिन कम होना
ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
हीमोग्लोबिन कम होने से क्या नुकसान हो सकता है?
बहुत कम या लंबे समय तक कम हीमोग्लोबिन रहने पर शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
इससे:
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अत्यधिक थकान
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सांस फूलना
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दिल की धड़कन बढ़ना
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काम करने की क्षमता कम होना
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गंभीर स्थिति में हृदय पर अतिरिक्त दबाव
पड़ सकता है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
डॉक्टर से जांच कराएं यदि:
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लगातार कमजोरी हो
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बार-बार चक्कर आए
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सांस फूलती हो
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चेहरा बहुत पीला हो
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बिना कारण वजन कम हो
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मल में खून आए
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काला मल हो
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मासिक धर्म में बहुत अधिक रक्तस्राव हो
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हीमोग्लोबिन बार-बार कम आए
कब तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए?
तुरंत सहायता लें यदि कम हीमोग्लोबिन के साथ:
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सांस लेने में बहुत परेशानी
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सीने में दर्द
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बेहोशी
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बहुत तेज धड़कन
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लगातार या अधिक रक्तस्राव
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खून की उल्टी
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बहुत अधिक कमजोरी
हो।
निष्कर्ष
हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण प्रोटीन है। इसका स्तर कम होने पर कमजोरी, थकान, चक्कर, सांस फूलना, त्वचा का पीला पड़ना और तेज धड़कन जैसे खून की कमी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
हीमोग्लोबिन कम होने का सबसे सामान्य कारण आयरन की कमी हो सकता है, लेकिन विटामिन की कमी, मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव, पाइल्स या पाचन तंत्र से खून जाना, गुर्दे की बीमारी और अन्य स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए केवल हीमोग्लोबिन बढ़ाने के बजाय उसके कम होने का वास्तविक कारण पता करना जरूरी है।
यदि पाइल्स, मल में खून या पाचन तंत्र से रक्तस्राव जैसी शल्य चिकित्सा संबंधी समस्या के कारण हीमोग्लोबिन कम होने का संदेह हो, तो डॉ. राजेश, गुरुग्राम में जनरल सर्जन, से मूल्यांकन और उपचार के लिए परामर्श लिया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. हीमोग्लोबिन क्या होता है?
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन है, जो शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है।
2. हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए?
सामान्य सीमा उम्र, लिंग और प्रयोगशाला के अनुसार बदलती है। वयस्क पुरुषों में लगभग 13–17 और महिलाओं में लगभग 12–15 ग्राम प्रति डेसीलीटर सामान्य सीमा में हो सकता है।
3. खून की कमी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
थकान, कमजोरी, चक्कर, चेहरा पीला होना और मेहनत में सांस फूलना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
4. हीमोग्लोबिन की कमी से कौन-सा रोग होता है?
कम हीमोग्लोबिन को आमतौर पर एनीमिया यानी खून की कमी से जोड़ा जाता है।
5. हीमोग्लोबिन कम होने का सबसे सामान्य कारण क्या है?
आयरन की कमी एक सामान्य कारण है, लेकिन रक्तस्राव, विटामिन की कमी और अन्य बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
6. क्या पाइल्स से हीमोग्लोबिन कम हो सकता है?
बार-बार या लंबे समय तक पाइल्स से रक्तस्राव होने पर हीमोग्लोबिन कम हो सकता है।
7. हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?
हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, राजमा, आयरन वाले अन्य खाद्य पदार्थ और विटामिन सी युक्त भोजन उपयोगी हो सकते हैं।
8. क्या केवल अनार से हीमोग्लोबिन बढ़ सकता है?
नहीं। अनार पौष्टिक है, लेकिन गंभीर खून की कमी के लिए कारण के अनुसार उचित उपचार जरूरी होता है।
9. हीमोग्लोबिन बहुत कम होने पर क्या होता है?
बहुत कम स्तर पर सांस फूलना, तेज धड़कन, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर या बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
10. हीमोग्लोबिन कम होने पर किस डॉक्टर को दिखाएं?
शुरुआती जांच के लिए सामान्य चिकित्सक से संपर्क किया जा सकता है। यदि कारण रक्तस्राव, पाइल्स या पाचन तंत्र की शल्य समस्या हो, तो संबंधित विशेषज्ञ या जनरल सर्जन की जरूरत हो सकती है।