कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाने वाला मोम जैसा एक वसा (Fat) पदार्थ है, जिसकी जरूरत कोशिकाओं और हार्मोन के निर्माण के लिए होती है। शरीर आवश्यक कोलेस्ट्रॉल खुद बनाता है, जबकि इसका कुछ हिस्सा भोजन से भी मिलता है।
समस्या तब होती है जब रक्त में विशेष रूप से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल अधिक हो जाता है। समय के साथ यह धमनियों की दीवारों में जमा होकर रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसका पता आमतौर पर रक्त की जांच से चलता है।
कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?
कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का वसायुक्त पदार्थ है जो रक्त में मौजूद रहता है।
शरीर को इसकी सीमित मात्रा की जरूरत होती है क्योंकि यह:
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कोशिकाओं की झिल्ली बनाने
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कुछ हार्मोन बनाने
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विटामिन डी के निर्माण
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पित्त अम्ल बनाने
में भूमिका निभाता है।
कोलेस्ट्रॉल अपने आप रक्त में नहीं घूम सकता। इसे विशेष प्रोटीन रक्त में ले जाते हैं, जिन्हें लिपोप्रोटीन कहा जाता है।
कोलेस्ट्रॉल कितने प्रकार का होता है?
आम तौर पर कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट में दो प्रमुख प्रकारों पर ध्यान दिया जाता है।
1. एलडीएल कोलेस्ट्रॉल
इसे अक्सर खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है।
अगर एलडीएल का स्तर अधिक हो जाए, तो यह धमनियों की दीवारों में जमा हो सकता है।
समय के साथ इससे धमनियां संकरी या कठोर हो सकती हैं।
2. एचडीएल कोलेस्ट्रॉल
इसे अक्सर अच्छा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है।
एचडीएल अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को रक्त से वापस यकृत तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां शरीर इसे संसाधित कर सकता है।
आमतौर पर एचडीएल का पर्याप्त स्तर हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।
ट्राइग्लिसराइड क्या होते हैं?
ट्राइग्लिसराइड कोलेस्ट्रॉल नहीं होते, लेकिन रक्त की वसा जांच में इन्हें भी मापा जाता है।
जब शरीर भोजन से मिली अतिरिक्त ऊर्जा तुरंत उपयोग नहीं करता, तो उसे ट्राइग्लिसराइड के रूप में जमा किया जा सकता है।
बहुत अधिक ट्राइग्लिसराइड भी हृदय रोग के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण क्या हैं?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिक कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण पैदा नहीं करता।
व्यक्ति वर्षों तक बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के साथ रह सकता है और उसे इसका पता नहीं चलता।
इसीलिए इसे कई बार एक “शांत” समस्या माना जाता है।
क्या कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर चक्कर आते हैं?
केवल बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण चक्कर आना सामान्य लक्षण नहीं है।
चक्कर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
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लो ब्लड प्रेशर
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खून की कमी
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कम ब्लड शुगर
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शरीर में पानी की कमी
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कान की समस्या
यदि चक्कर बार-बार हो रहे हैं, तो कारण की जांच करानी चाहिए।
क्या कोलेस्ट्रॉल से सिरदर्द होता है?
उच्च कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर सीधे सिरदर्द का कारण नहीं बनता।
लेकिन अगर इसके कारण धमनियों और रक्त प्रवाह से संबंधित गंभीर समस्या विकसित हो जाए, तो अन्य लक्षण सामने आ सकते हैं।
सिर्फ सिरदर्द को बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल से क्या संकेत दिखाई दे सकते हैं?
सामान्य बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल में लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ दुर्लभ आनुवंशिक स्थितियों में बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल होने पर:
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त्वचा के नीचे पीले वसायुक्त जमाव
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आंखों के आसपास पीले धब्बे
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आंख की पुतली के आसपास हल्का सफेद या धूसर घेरा
दिखाई दे सकता है।
ऐसे बदलाव होने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल कैसे बढ़ता है?
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के पीछे एक ही कारण नहीं होता।
कई जीवनशैली और आनुवंशिक कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
1. अधिक संतृप्त वसा वाला भोजन
बहुत अधिक मात्रा में:
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घी
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मक्खन
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मलाई
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अधिक वसा वाला मांस
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तला भोजन
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कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ
लेने से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
2. ट्रांस वसा
कुछ तले हुए और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में ट्रांस वसा हो सकती है।
यह खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करने से जुड़ी हो सकती है।
3. वजन बढ़ना
विशेष रूप से पेट के आसपास अधिक चर्बी होने पर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर प्रभावित हो सकता है।
अधिक वजन इंसुलिन प्रतिरोध और फैटी लिवर से भी जुड़ा हो सकता है।
4. शारीरिक गतिविधि की कमी
लंबे समय तक बैठकर रहने और कम व्यायाम करने से:
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वजन बढ़ सकता है
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एचडीएल कम हो सकता है
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ट्राइग्लिसराइड बढ़ सकते हैं
नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है।
5. धूम्रपान
धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है।
यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी प्रभावित कर सकता है।
6. परिवार में अधिक कोलेस्ट्रॉल
कुछ लोगों में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल आनुवंशिक कारणों से होता है।
ऐसी स्थिति में कम उम्र से ही एलडीएल बहुत अधिक हो सकता है।
अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है, तो जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।
7. मधुमेह
अनियंत्रित ब्लड शुगर रक्त में वसा के स्तर को प्रभावित कर सकती है।
मधुमेह वाले लोगों में एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड का संतुलन बिगड़ सकता है।
8. थायरॉइड की समस्या
थायरॉइड हार्मोन कम होने की स्थिति में कुछ लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
9. गुर्दे या यकृत की बीमारी
कुछ गुर्दे और यकृत संबंधी समस्याएं भी रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का जोखिम किन लोगों में अधिक होता है?
जोखिम बढ़ सकता है यदि:
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वजन अधिक हो
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पेट पर अधिक चर्बी हो
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व्यायाम कम करते हों
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परिवार में हृदय रोग हो
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डायबिटीज हो
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धूम्रपान करते हों
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ब्लड प्रेशर अधिक हो
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भोजन में संतृप्त वसा अधिक हो
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उम्र बढ़ रही हो
हालांकि पतले और सक्रिय लोगों में भी आनुवंशिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
कोलेस्ट्रॉल कितना होना चाहिए?
सामान्यतः रक्त की वसा जांच में कई मान देखे जाते हैं।
कुल कोलेस्ट्रॉल
आमतौर पर:
200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम स्तर वांछनीय माना जाता है।
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल
आमतौर पर:
100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम स्तर अच्छा माना जाता है।
लेकिन जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, मधुमेह या हृदय संबंधी बहुत अधिक जोखिम है, उनमें डॉक्टर इससे भी कम लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं।
एचडीएल कोलेस्ट्रॉल
आमतौर पर अधिक एचडीएल बेहतर माना जाता है।
कम स्तर हृदय संबंधी जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
ट्राइग्लिसराइड
आमतौर पर:
150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम स्तर वांछनीय माना जाता है।
ध्यान रखें कि सामान्य सीमा प्रयोगशाला, उम्र और मरीज के स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है।
कोलेस्ट्रॉल की जांच कौन-सी होती है?
कोलेस्ट्रॉल जांच को आमतौर पर लिपिड प्रोफाइल कहा जाता है।
इसमें अक्सर मापा जाता है:
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कुल कोलेस्ट्रॉल
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एलडीएल
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एचडीएल
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ट्राइग्लिसराइड
कुछ मरीजों में डॉक्टर अन्य संबंधित जांच भी करवा सकते हैं।
क्या कोलेस्ट्रॉल जांच खाली पेट करनी होती है?
कुछ स्थितियों में बिना खाली पेट भी लिपिड प्रोफाइल किया जा सकता है।
लेकिन अगर डॉक्टर विशेष रूप से खाली पेट जांच की सलाह दें, खासकर ट्राइग्लिसराइड के सही मूल्यांकन के लिए, तो उसी निर्देश का पालन करना चाहिए।
कितनी उम्र में कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए?
सिर्फ उम्र बढ़ने के बाद ही जांच शुरू करना जरूरी नहीं है।
परिवार में बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल, कम उम्र में हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर पहले भी जांच की सलाह दे सकते हैं।
जांच कितनी बार करनी है, यह व्यक्तिगत जोखिम पर निर्भर करता है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से क्या नुकसान हो सकता है?
समय के साथ एलडीएल धमनियों की दीवार में जमा होकर प्लाक बना सकता है।
इस प्रक्रिया के कारण धमनियां संकरी हो सकती हैं।
इससे जोखिम बढ़ सकता है:
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हृदयाघात
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स्ट्रोक
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पैरों की धमनियों में रक्त प्रवाह की समस्या
इसीलिए बिना लक्षण के भी बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।
क्या कोलेस्ट्रॉल से सीने में दर्द हो सकता है?
कोलेस्ट्रॉल सीधे तुरंत सीने में दर्द नहीं करता।
लेकिन लंबे समय में धमनियों में जमाव के कारण हृदय तक रक्त का प्रवाह कम हो जाए, तो सीने में दर्द हो सकता है।
अगर सीने में:
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दबाव
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जकड़न
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दर्द
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सांस फूलना
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पसीना
हो, तो इसे केवल गैस या कोलेस्ट्रॉल मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल कम करने के उपाय क्या हैं?
1. भोजन में बदलाव करें
संतृप्त और ट्रांस वसा कम करें।
भोजन में अधिक शामिल करें:
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सब्जियां
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फल
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साबुत अनाज
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दालें
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फलियां
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मेवे
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बीज
2. घुलनशील फाइबर बढ़ाएं
घुलनशील फाइबर एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद कर सकता है।
इसके स्रोतों में शामिल हैं:
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ओट्स
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जौ
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दालें
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फलियां
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कुछ फल
3. नियमित व्यायाम करें
नियमित शारीरिक गतिविधि:
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वजन नियंत्रित करने
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एचडीएल बढ़ाने
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ट्राइग्लिसराइड कम करने
में मदद कर सकती है।
व्यायाम की मात्रा स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए।
4. वजन कम करें
अधिक वजन वाले लोगों में शरीर के वजन का कुछ हिस्सा कम करना भी कोलेस्ट्रॉल और अन्य चयापचय स्वास्थ्य संकेतों में सुधार कर सकता है।
5. धूम्रपान बंद करें
धूम्रपान छोड़ना हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए क्या खाना चाहिए?
भोजन में शामिल किया जा सकता है:
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ओट्स
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दालें
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राजमा
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चना
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हरी सब्जियां
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फल
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साबुत अनाज
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बादाम और अखरोट सीमित मात्रा में
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अलसी या अन्य बीज
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कम वसा वाले प्रोटीन स्रोत
भोजन की कुल मात्रा और वजन नियंत्रण भी महत्वपूर्ण हैं।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर क्या नहीं खाना चाहिए?
अत्यधिक मात्रा में इन चीजों को सीमित करना उपयोगी हो सकता है:
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बहुत अधिक घी
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मक्खन
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मलाई
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तली हुई चीजें
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फास्ट फूड
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अत्यधिक प्रसंस्कृत स्नैक्स
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अधिक वसा वाला मांस
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ट्रांस वसा वाले उत्पाद
पूरी तरह किसी एक भोजन को प्रतिबंधित करने की जरूरत हर व्यक्ति में समान नहीं होती।
क्या अंडा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है?
अंडे में कोलेस्ट्रॉल होता है, लेकिन रक्त कोलेस्ट्रॉल पर प्रभाव केवल किसी एक भोजन से तय नहीं होता।
कुल भोजन पैटर्न, संतृप्त वसा, वजन, व्यायाम और आनुवंशिकता भी महत्वपूर्ण हैं।
अगर कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक है या हृदय रोग का जोखिम है, तो व्यक्तिगत आहार सलाह लेना बेहतर है।
क्या घी खाना बंद करना जरूरी है?
हर व्यक्ति को पूरी तरह घी बंद करने की जरूरत नहीं होती।
लेकिन यदि भोजन में पहले से संतृप्त वसा अधिक है या एलडीएल बहुत बढ़ा हुआ है, तो घी की मात्रा कम करने की सलाह दी जा सकती है।
मुख्य बात कुल संतृप्त वसा को नियंत्रित करना है।
क्या कोलेस्ट्रॉल केवल मोटे लोगों में बढ़ता है?
नहीं।
पतले व्यक्ति में भी:
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आनुवंशिक कारण
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थायरॉइड की समस्या
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डायबिटीज
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खराब खान-पान
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अन्य स्वास्थ्य स्थितियां
कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती हैं।
इसलिए शरीर का वजन सामान्य होने से यह निश्चित नहीं होता कि कोलेस्ट्रॉल भी सामान्य होगा।
कोलेस्ट्रॉल का इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज व्यक्ति के कुल हृदय जोखिम पर निर्भर करता है।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
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भोजन में बदलाव
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नियमित व्यायाम
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वजन नियंत्रण
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धूम्रपान बंद करना
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ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित रखना
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डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं
क्या कोलेस्ट्रॉल की दवा जरूरी होती है?
हर बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले व्यक्ति को दवा की जरूरत नहीं होती।
डॉक्टर दवा की आवश्यकता तय करते समय देखते हैं:
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एलडीएल का स्तर
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उम्र
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डायबिटीज
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ब्लड प्रेशर
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धूम्रपान
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पहले हृदय रोग हुआ है या नहीं
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परिवार का इतिहास
कुछ मरीजों में जीवनशैली सुधार पर्याप्त हो सकता है, जबकि अन्य में दवा जरूरी हो सकती है।
कोलेस्ट्रॉल की कौन-सी दवा दी जाती है?
उच्च एलडीएल को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर अक्सर स्टैटिन वर्ग की दवाओं का उपयोग कर सकते हैं।
इसके अलावा कुछ मरीजों में अन्य दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
दवा का चुनाव व्यक्तिगत जोखिम और रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।
अपनी ओर से कोलेस्ट्रॉल की दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।
क्या कोलेस्ट्रॉल हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
यह उसके कारण पर निर्भर करता है।
जीवनशैली के कारण बढ़े कोलेस्ट्रॉल में:
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वजन कम करना
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नियमित व्यायाम
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संतुलित भोजन
से काफी सुधार हो सकता है।
लेकिन आनुवंशिक कारणों से बढ़े कोलेस्ट्रॉल में लंबे समय तक निगरानी और दवा की आवश्यकता हो सकती है।
कितने समय में कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है?
कोलेस्ट्रॉल में बदलाव कुछ हफ्तों से कुछ महीनों में दिखाई दे सकता है।
यह निर्भर करता है:
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शुरुआती स्तर
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भोजन
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वजन
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व्यायाम
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दवा
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आनुवंशिकता
डॉक्टर उपचार शुरू करने के बाद उचित समय पर दोबारा जांच की सलाह दे सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का क्या संबंध है?
अधिक वजन और पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी कई लोगों में:
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एलडीएल बढ़ने
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ट्राइग्लिसराइड बढ़ने
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एचडीएल कम होने
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इंसुलिन प्रतिरोध
से जुड़ी हो सकती है।
इसलिए वजन प्रबंधन हृदय और चयापचय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
कोलेस्ट्रॉल की जांच और चिकित्सकीय सलाह लें यदि:
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रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल बार-बार अधिक आए
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परिवार में कम उम्र में हृदय रोग हुआ हो
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डायबिटीज हो
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हाई ब्लड प्रेशर हो
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वजन अधिक हो
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धूम्रपान करते हों
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पहले हृदय या रक्त वाहिका की बीमारी रह चुकी हो
किन लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें?
अगर:
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अचानक सीने में तेज दर्द
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सीने में दबाव या जकड़न
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सांस फूलना
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अत्यधिक पसीना
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चेहरे या शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी
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बोलने में अचानक परेशानी
हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
ये हृदयाघात या स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति के संकेत हो सकते हैं।
निष्कर्ष
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी वसायुक्त पदार्थ है, लेकिन एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का बहुत अधिक स्तर धमनियों में जमा होकर हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है।
संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण और धूम्रपान से बचने से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। कुछ लोगों में डॉक्टर जोखिम और रिपोर्ट के आधार पर दवा की सलाह भी दे सकते हैं।
यदि मोटापा या वजन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं मौजूद हैं, तो डॉ. राजेश, गुरुग्राम में जनरल और बेरिएट्रिक सर्जन, वजन प्रबंधन और बेरिएट्रिक सर्जरी से संबंधित मूल्यांकन के लिए परामर्श प्रदान करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?
कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाने वाला वसायुक्त पदार्थ है, जिसकी जरूरत कोशिकाओं और कुछ हार्मोन के निर्माण के लिए होती है।
2. कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण क्या हैं?
अधिक कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता। इसका पता रक्त की जांच से चलता है।
3. कोलेस्ट्रॉल कितना होना चाहिए?
कुल कोलेस्ट्रॉल सामान्यतः 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम वांछनीय माना जाता है, लेकिन लक्ष्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य जोखिम पर निर्भर करता है।
4. एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कितना होना चाहिए?
कई लोगों में 100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम अच्छा माना जाता है। उच्च जोखिम वाले मरीजों में डॉक्टर इससे कम लक्ष्य तय कर सकते हैं।
5. कोलेस्ट्रॉल कैसे बढ़ता है?
अधिक संतृप्त वसा, कम व्यायाम, मोटापा, धूम्रपान, डायबिटीज और आनुवंशिक कारण कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकते हैं।
6. क्या पतले लोगों का भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है?
हां। आनुवंशिक कारण और अन्य बीमारियां सामान्य वजन वाले व्यक्ति में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती हैं।
7. क्या कोलेस्ट्रॉल में अंडा खा सकते हैं?
कई लोग संतुलित आहार के हिस्से के रूप में अंडा खा सकते हैं। मात्रा व्यक्तिगत जोखिम और पूरी डाइट के अनुसार तय की जानी चाहिए।
8. कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए क्या खाएं?
ओट्स, दालें, फलियां, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और उचित मात्रा में मेवे उपयोगी हो सकते हैं।
9. क्या कोलेस्ट्रॉल की दवा जीवनभर लेनी पड़ती है?
यह व्यक्ति के जोखिम और कोलेस्ट्रॉल के कारण पर निर्भर करता है। दवा बंद करने का निर्णय डॉक्टर से सलाह के बाद ही होना चाहिए।
10. क्या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हृदयाघात का कारण बन सकता है?
लंबे समय तक अधिक एलडीएल धमनियों में प्लाक बनने में योगदान दे सकता है, जिससे हृदयाघात और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।